बिहार शराबबंदी – बिहार में अँग्रेज़ी बोलने वालो की संख्या में भारी कमी.


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एक ताज़ा सर्वे के मुताबिक पहले से ही पड़ाई लिखाई में पिछड़े हुए बिहार में अब जल्द ही अँग्रेज़ी को बोलने वालों का भारी संकट पैदा होने वाला है. इस सर्वे से जो तथ्य सामने आए वह वाकई हैरान और परेशान कर देने वाले हैं. हाल ही में लागू हुए शराब बंदी के कारण बिहार में अँग्रेज़ी बोलने वालों की संख्या में काफ़ी गिरावट देखी गयी है.

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शराब बंदी से पहले बिहारी टल्ली होकर फ़र्राटे दार अँग्रेज़ी बोलता हुआ. ऐसा द्रश्य अब दुर्लभ है.

इस सर्वे में 32457 बिहारी युवाओं ने भाग लिया और उनमे से 32456 ने माना की शराब बंदी के कारण अब वे मामूली सी अँग्रेज़ी भी नहीं बोल पा रहे. गौरतलब यह सर्वे भी हिन्दी भाषा में ही किया गया क्यूंकी सभी भाग लेने वाले अँग्रेज़ी की A, B, C भी बोलने और समझने में असमर्थ नज़र आए.

उन सभी का मानना है की बिहार में शराब बंदी से होने वाले नुकसान की भरपाई कर पाना भी भविष्य में नामुमकिन होगा. इस लिए उन सभी ने आवाज़ उठाई है की शराब पर लगे इस Ban को जल्द हटाया जाए अन्यथा भारी संख्या में बिहारी युवक बेरोज़गारी का शिकार हो जाएँगे.

अखिल बिहारी बेवड़ा संगठन के अध्यक्ष श्री टल्ली बिहारी ने बताया की इस शराब बंदी की वजह से बरसों से चली आ रही नागिन डांस कला के भी विलुप्त होने के आसार बड़ गये हैं. उनके मुताबिक अगर यह ban जल्द ही ना हटाया गया तो भविष्य में बाघ तो काफ़ी फिर भी मिल जाएँगे लेकिन अँग्रेज़ी बोलने वाले और नागिन डांस करने वाले बिहारी ढूँढने पर भी नहीं मिलेंगे.

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टल्ली बिहारियों का नागिन डांस का एक और दुर्लभ द्रश्य. यह अनोखी कला अब विलुप्त होने के कगार पर.

कुछ और तथ्य जो इस सर्वे से निकल कर सामने आए वह यह हैं की भारी संख्या में बिहारीओं ने दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों की तरफ पलायन करना शुरू कर दिया है. सुनने में आया की बिहार में भारी बेरोज़गारी और भुखमरी के चलते भी दूसरे प्रदेशों में काम ढूँढने ना जाने वाले बिहार प्रेमी बिहारी भी शराब ना मिलने के कारण ऐसा कदम उठाने को मज़बूर हो गये हैं.

इस पर दूसरे प्रदेशों में रहने वाले लोगो ने भारी चिंता जताई है और इसलिए उन लोगो ने भी बिहारी युवकों और अखिल बिहारी बेवड़ा संगठन की माँगो का समर्थन किया है. उन बिहारियों का पलायन अपने राज्यों में रोकने के लिए दिल्ली और मुंबई की कई RWAs के अध्यक्षों ने बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार से गुहार लगाई है की इस शराब बंदी को हटाया जाए. सुनने में आया है की इन RWAs ने मिलकर बिहार के बॉर्डर पर ही शराब बाँटने के लिए कई स्टाल लगाए हैं ताकि बिहारी पीकर टल्ली होकर वापिस अपने राज्य में ही लौट जाएँ और दूसरे राज्यों में घुस ना सकें.

उधर दूसरी तरफ यह सुनने और देखने में आ रहा है की अब शराब बंदी के बाद बिहार में कोई भी बेवड़ा टल्ली होकर नाली इत्यादि में गिरा हुआ नज़र नही आ रहा. ऐसा इसलिए हो रहा हैं क्यूंकी उन गिरे हुए बेवड़ो को लोग उठा कर अपने घर ले जा रहे हैं. और उसको होश में लाने के बाद उसको मूह माँगे पैसे और अन्य दवाब देकर पूछने की कोशिश कर रहे हौं की आख़िर उसने शराब बंदी की बाद भी बिहार में किस जगह से शराब खरीदी.

इन दिनो बिहार में आप काफ़ी लोगो को बिहार की नाली और गटर इत्यादि के आसपास घूमते देख सकते हैं ताकि कोई नशे में गिरा हुआ बेवड़ा उनको नज़र आ सके.

उधर ban होंने वाली चीज़ों पर गिध सी नज़र रखने वाले बाबा रामदेव को बिहार में शराब बंदी से एक बार फिर से हरकत में आ गये हैं और पतंजलि के नाम पर शराब को कोई देसी या हर्बल संस्करण लाने पर विचार कर रहे हैं.

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