Seniority का हवाला देकर चार साल से फेल होते छात्र ने मॉनिटर बनाने की मांग की।

loading...

Disclaimer: Articles on this website are fake and a work of fiction and not to be taken as genuine or true. इस साइट के लेख काल्पनिक हैं. इनका मकसद केवल मनोरंजन करना, व्यंग्य करना और सिस्टम पर कटाक्ष करना है नाकि किसी की मानहानि करना.
Share Button

अलीगढ़ के एक सरकारी स्कूल से एक बहुत बड़ा व महत्वपूर्ण विवाद सामने आया है। यह बारहवीं में तीन साल से फेल हो रहे एक लड़के ने स्कूल वालों से मांग की है की seniority के आधार पर उसे monitor बनाया जाना चाहिए।

फरहान कुरैशी नाम के इस लड़के का कहना है की पिछले तीन साल से वो एक ही क्लास में है और नए आने वाले बच्चों के मुकाबले उसके पास अनुभव कहीं ज्यादा है। इसलिए उसे दरकिनार कर के नए बच्चों को मॉनिटर नहीं बनाया जाना चाहिए।

उसकी जगह नए बच्चों को मौका देना seniority के सिद्धान्त की अवहेलना है।

manish-tewari-army-chief-seniority-satire

कुरैशी साहब का ये बयान कांग्रेस नेता मनीष तिवारी के उस प्रेस कॉन्फ्रेन्स के तुरन्त बाद आया जिसमें उन्होंने आर्मी चीफ की नियुक्ति में seniors को दरकिनार कर देने की बात उठाई थी।

कुरैशी के स्कूल के हिन्दी टीचर को शक है की ये “सिद्धान्त और “अवहेलना” जैसे शब्द इन्होंने मनीष तिवारी के प्रेस कॉन्फ्रेन्स से ही सीखे हैं।

हालांकि इस बात का जवाब कोई नहीं दे पाया की कुरैशी साहब भरी जवानी में गाने-फिल्में छोड़ कर न्यूज़ चैनल क्यों देख रहे थे।

 

यहां ध्यान देने वाली बात ये है की कुरैशी साहब को नौंवी और ग्यारहवीं में भी दो-दो साल का अनुभव है। अगर उन्हें मौका दिया जाता तो शायद इस अनुभव की मदद से वो कक्षा के लिए बेहतर काम कर पाते।

 

सहपाठियों से पता चला है की कुरैशी साहब के पास मार्क्स को छोड़ कर बाकी सब कुछ था। डील-डौल, आक्रामकता, पैसे, गुंडागर्दी करने वाले दोस्तों की बड़ी सी फौज।

 

लेकिन फिर भी इन खूबियों को दरकिनार कर के सिर्फ मार्क्स के आधार पर एक नए लड़के को मॉनीटर बना दिया गया। इसे आप स्कूल प्रशासन की नाकामी ख सकते हैं।

वैसे कुरैशी साहब की तो एक गर्ल-फ्रेंड भी है। इन नए बच्चों में से किसी की औकात है लड़की पटाने की?

ये एक लड़की सम्भाल नहीं सकते, क्लास क्या सम्भालेंगे!

कुरैशी साहब के चमचों ने तो यहां तक कह दिया कि ये सब मोदी का किया-धरा है। उन्होंने साम्प्रदायिक आधार पर मिश्रा जी को मॉनिटर नहीं बनने दिया।

ये शिक्षा व्यवस्था का भगवाकरण करना चाहते हैं। इसलिए इनसे बर्दाश्त नहीं हुआ की कोई मुसलमान मॉनिटर बन जाये।

 

उनका कहना था की मोदी और BJP को मुसलमान पसन्द नहीं हैं। और अभी UP चुनाव आने वाले हैं तो इस वजह से BJP ध्रुवीकरण में लगी हुई है। कुरैशी जी को मॉनिटर ना बनने देना भी हिन्दू तुष्टिकरण व ध्रुवीकरण की गम्भीर कोशिश है।

स्कूल प्रशासन ने इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। और BJP के नेताओं ने भी “जानकारी नहीं है” कह कर बात को टालने की कोशिश की।

 

हालांकि खबर ये आ रही है की ओवैसी साहब और उनकी पार्टी फरहान कुरैशी की मदद के लिए आगे आने के बारे में सोंच रही है।

शायद राहुल गांधी और केजरीवाल, जो की छात्रों का JNU से समर्थन कर के आ चुके हैं, वो अलीगढ़ की टर्न भी पकड़ ही लें। देखते हैं ये seniority पॉलिटिक्स क्या रंग लाति है।

Share Button

Did you like the above post? Why Not Share Your Opinion Below.

loading...

हमारे सभी अप्डेट्स सबसे पहले हासिल करने के लिए - हमारा फेसबुक पेज लाईक करें, और हमें ट्विटर पर फॉलो करें.और हमारा यू ट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें. और हमें इंस्टाग्राम पर फॉलो करें.

आज का Viral Video देखिये और हमारा YouTube Channel Subscribe करना ना भूले.

अगर विडियो Play ना हो या कोई Error दिखाए, तो हमारे YouTube Channel के Link पर Click कीजिये और देखिये.

Follow Us On Twitter


Like Us On Facebook

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

Add Comment