दिल्ली सरकार का ऐलान- JNU में NDTV के लिए लगेगी बड़ी स्क्रीन।

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आजकल सुर्खियों से दूर चल रहे केजरीवाल जी ने मोदी-राहुल से T‍V वापस छीनने के लिए बड़ा दाव खेला है। उनकी सरकार ने बीती रात प्रेस कॉन्फ्रेन्स में ऐलान किया है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में विभिन्न जगहों पर बड़ी- बड़ी TV स्क्रीन लगेंगी, ताकि वहां के अति बुध्दिजीवी छात्रों को बुद्धिजीवी ज्ञान की खुराक बराबर मिलती रहे।

 

आम आदमी पार्टी के वो योगेन्द्र यादव जैसे दिखने वाले सदस्य जिनकी योगेन्द्र यादव से ज्यादा दाढ़ी है, वो प्रेस कॉन्फ्रेंस में बता रहे थे कि सरकार ने ये फैसला बाकी के चैनलो के intolerance की वजह से लिया है।

PM मोदी ने कहा JNU में 3000 इस्तेमाल किए हुए कॉन्डोम का मिलना “मेक इन इंडिया” के विरुध.

 

उनकी बात भी सही है। लगभग सारे चैनल आजकल या तो मोदी-राहुल के भाषण दिखाते हैं या फिर आयकर विभाग के छापों में नोट गिनते रहते हैं।

 

जो दलित है, जो पीड़ित है, जो सताया हुआ है या जो अल्पसंख्यक है और जो आतंकवादियों के परिवार से है, जैसे भटकल की बीवी और उसके दस बच्चे, इनका सहारा आखिर कौन बनेगा? चलो सहारा तो ये JNU वाले बन भी जाएं, लेकिन उनकी खबर campus तक पहुंचाए कौन?

 

अब यही काम करता है NDTV। ये एकलौता ऐसा चैनल है जो कि दलितों की, पीड़ितों की, अल्पसंख्यकों की और आतंकवादियों के परिवार वालों की जैसे भटकल की बीवी और उसके दस बच्चों की खबरों को अपने चैनल पर जगह देता है।

NDTV से खबरें देखकर ही ये बुद्धिजीवी अपनी सारी रणनीति निर्धारित करते हैं। अखलाक की खबर भी NDTV ही तीन चार दिनों तक फ़्लैश में चला रहा था, तब जाके वो अवार्ड वालों ने इसको पकड़ा था।

 

अब ऐसे background के साथ jnu वालों की बुद्धिजीविता के लिए जरूरी है की वो NDTV देखते रहें। आखिर कार वो अभी छात्र ही तो हैं, उन्हें सीखने की बहुत आवश्यकता है।

BJP विधायक ज्ञानदेव आहूजा के द्वारा JNU में ढूंदे गये 3000 कॉन्डोम में हवा भर के प्रधानमंत्री मोदी ने इंडिया गेट पर हवा में उड़ाए|

दिल्ली सरकार का ये स्क्रीन लगाने वाला फैसला ऐसे समय में आया है जब UP चुनाव के पहले फिर सब किसी intolerance debate की बात जोह रहे हैं।

 

आशा है कि इस कदम से NDTV के रिपोर्टरों और JNU के छात्रों का क्रमशः मनोबल व ज्ञान बढ़े और वो जल्दी ही intolerance जैसा कोई मुद्दा ढूंढ निकालें।

TV screen लगाने के लिए गंगा ढाबा और library जैसी महत्वपूर्ण जगहों का चुनाव किया गया है।

 

वैसे जब हमारे संवाददाता JNU पहुंचे तब तक वो दाढ़ी वाले नेता बड़ी-बड़ी स्क्रीन टेम्पो में डाल के ला भी चुके थे। और एक स्क्रीन तो बाकायदा फिट भी कर दी गयी थी। आस-पास छात्र जमा भी हो चुके थे और ये दढ़ियल नेता उनको इसके फायदे बता रहे थे।

हालांकि जैसे ही स्क्रीन on हुई, सामने ज़ी न्यूज़ चल रहा था। बस इस वजह से पहली स्क्रीन तो बस पत्थरों का शिकार हो गयी।
पूछने पर आप के उन दढ़ियल नेता जी ने बताया सब मिले हुए हैं, और उनके इस कदम को फेल करने के लिए ही ज़ी न्यूज़ ने खुद को फ्री कर दिया था।

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