H1B वीसा रूल सख्त होने की वजह से TCS को अब कर्मचारियों की जगह सॉफ्टवेयर ही बेचना पड़ेगा.


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डोनाल्ड ट्रम्प के अपने चुनावी वायदे के मुताबिक H1B वीसा के नियम को सख्त बनाने के निर्णय लिया है. इसके चलते देश की कई बड़ी नामी गिरामी सॉफ्टवेयर कंपनियों की नींद उड़ गयी है.
गौरतलब है की H1B वीसा के तहत देश की सॉफ्टवेयर कंपनियां अपने कर्मचारियों को अमेरिका में क्लाइंट्स के साथ काम करने के लिए भेजती है. इसके एवज में यह कंपनियां अमेरिकी कंपनियों से मोटी रकम वसूलती हैं (जोकि उस कर्मचारी की सैलरी से कई गुना ज्यादा होता है).

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देश की सबसे बड़ी कर्मचारी सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी TCS (तमिल कंसल्टेंसी सर्विसेज) की टॉप तमिल मैनेजमेंट की हालात काफी ख़राब है. अपने कर्मचारियों को थोक के भाव अमेरिका एक्सपोर्ट करके पैसा कमाने वाली TCS के पास अब और कोई चारा नहीं बचा है सिवाए इसके की अब कंपनी सीरियसली सॉफ्टवेयर बनाने और एक्सपोर्ट करने पर ध्यान दे नाकि अपने एम्प्लाइज को.
TCS के एक प्रवक्ता (जोकि, TCS के सीईओ के जीजा के दोस्त के भाई हैं) ने बताया की वे डोनाल्ड ट्रम्प के इस फैसले का विरोध करेंगे. साथ ही कंपनी ने बाजार की छूट-पुट कंपनियों से सॉफ्टवेयर खरीदने शुरू कर दिए हैं जिस पर अपना ठप्पा लगा कर वे अमेरिका को चेप सकें.

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