गायों की रक्षा के लिए मोदी सरकार बनाएगी “गौ रक्षक पुलिस फ़ोर्स”.

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भाजपा सरकार का गाय प्रेम वैसे तो जग जाहिर है लेकिन हाल ही में भाजपा ने इस प्रेम रूपी माला में एक अनमोल मोती पिरो दिया है। केन्द्र सरकार ने फ़ैसला किया है कि गायों की सुरक्षा के लिये एक नया पुलिस बल- ‘गौ-रक्षक पुलिस फ़ोर्स’ (GRPF) बनाया जायेगा। इस फ़ोर्स में दो लाख जवानों की भर्ती की जाएगी और इस भर्ती की परीक्षा UPSC आयोजित कराएगा।

इस बारे में जब हमने GRPF चयन बोर्ड के सचिव श्याम गौपाल जी से पूछा कि “GRPF के लिए बजट कहाँ से आएगा?”, तो उन्होंने बताया कि “जैसा कि आप जानते हैं कि एक जुलाई से केंद्र सरकार एक नया टैक्स लागू कर रही है- ‘गौ सेवा टैक्स’ (GST), तो उसी का सारा पैसा लगाया जायेगा GRPF बनाने में!” इसके बाद GRPF के गठन के बारे में विस्तार में बताते हुए उन्होंने कहा कि गौ रक्षकों को निम्नलिखित तीन श्रेणियों में बाँटा जाएगा-

ग्रेड A के गौ-रक्षकों की न्यूनतम क्वालिफिकेशन होगी पीएचडी और वो भी COW साइकोलॉजी में। ग्रेड A के गौ-रक्षक गाय को देखते ही बता सकेंगे कि गाय सुखी है या दुखी। गायों से बात करना, गायों की मनो-व्यथा को समझना, उन्हें सांत्वना देना, उन्हें मानसिक रूप से प्रबल बनाना और आत्म-रक्षा सिखाना इस श्रेणी के अफ़सरों का अहम कार्य रहेगा।

ग्रेड B के गौ-रक्षक कम से कम ग्रेजुएट होने चाहिये। इनका काम होगा गायों को नये ज़माने के अनुसार ढालना। अक्सर देखा गया है कि गाय सड़क और पटरियों के बीच बैठ जाती है, ट्रैफिक सिग्नल पे नहीं रुकती, कहीं भी गोबर कर देती है, प्लास्टिक की थैलियां खाने लग जाती है| गायों के इस प्रकार के गँवारपन को दूर करना इस श्रेणी के कर्मचारियों का प्रमुख कार्य होगा। इसके अलावा, गर्मियों में गायों को धूप के चश्मे, टोपी और सर्दियों में कम्बल बाँटना जैसे अनेक कार्य भी इस श्रेणी के कर्मचारियों द्वारा किये जायेंगे।

ग्रेड C के गौरक्षकों के लिये कोई न्यूनतम क्वालिफिकेशन नही है, उन्हें बस लाठी-डंडे और चक्कू-तलवार चलानी आनी चाहिये और रात को जगना आना चाहिये। गाड़ियों के पीछे भगा कर इनका रनिंग टेस्ट लिया जाएगा। इन्हें बस गाय पे एक निबन्ध लिखना पड़ेगा- ‘गाय हमारी माता है’ टाइप। GRPF की यही श्रेणी सबसे महत्वपूर्ण है। अभी भी इस श्रेणी के बहुत से गैर-सरकारी जवान स्वैच्छिक रूप से अपने कार्य में जी-जान से लगे हुए हैं और पुलिस की मदद के बिना, कानून को अपने मजबूत कन्धों पे उठा के, अपना कार्य निपुणता से कर रहे है।

इस बारे में जब हमने एक स्व-प्रशंसित गौ-रक्षक कोपाल दास जी से बात की तो उन्होंने अति हर्ष और उल्लास के साथ हमें बताया कि “या से भरिया बात और का हो सकेगी, जो काम हम ऐसे ही अपना फ़्रस्ट्रेशन निकालबे के लिए करते थे अब बा के पैसे भी मिलेंगे। आखिर गौ-माता ने हमारी सुन ही ली। बस एक निबंध लिखने में थोड़ी परेसानी है, ऊ का है कि गायों के बारे में हमें ज्यादा ज्ञान नहीं है ना!”

यह खबर सुनने के बाद, देश के सभी तबेले, कोचिंग क्लासेज में बदल गए हैं और COW साइकोलॉजी पे PHD करने वालों की संख्या एकदम से बढ़ गई है। ‘काऊ’ पिछले दो दिनों में गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च करे जाने वाला शब्द बन गया है। अब गूगल पे ‘How’ लिखते ही आगे आ जाता है ‘How to know your cow’!

अब देखना यह है कि क्या GRPF गायों को उनका हक़ दिला पायेगी या हर बार की तरह इस बार भी खा लिया जाएगा उनका चारा!

Source: Faking News.

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