मोदी की बकबक सुन, रावण ने खुद ही आत्मदाह किया और छोड़ी राम के नाम चिठ्ठी.


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कल, एक बार फिर दशहरा का पर्व बीत गया. एक बार फिर से पुरे देश ने जीवित और असली रावणो के द्वारा एक नकली रावण के पुतले को जलाते हुए देखा. रावण के पुतले तो दहन हो गए और ख़त्म हो गए लेकिन उनको दहन करने वाले असली रावण फिर से अपनी दुनिया में वापिस अपनी रावनीयत दिखने चले गए.

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परम्परा के मुताबिक, देश के प्रधानमंत्री भी किसी बड़ी रामलीला के रावण दहन प्रोग्राम में शिरकत करते हैं. अमूमन वे दिल्ली की ही मशहूर रामलीला ग्राउंड के रावण दहन में हिस्सा लेते हैं. लेकिन इस बार बात कुछ और थी. अब तो उत्तर प्रदेश के चुनाव आने वाले हैं. तो जाहिर से बात है इन मौकापरस्त नेताओं के लिए चुनाव जीतने से बड़ी चीज और कोई नहीं होती. तो जी, पहुँच गए हमारे देश ले “होनहार” प्रधानमंत्री मोदी जी भी उत्तर प्रदेश के लखनऊ में, रावण को जलाने के लिए.

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आदत से मजबूर, मोदी जी चढ़ गए स्टेज पर और ले लिए माइक अपने हाथ में और लगे लंबी लंबी हांकने. फेंकने में तो कोई भी उनके आगे नहीं ठहरता. तो स्टेज पर अपने भाषण की बकबक में वे अपने आप को राम से कम थोड़ी आंक रहे थे, ऊपर से रावण को जलाने की जिम्मेवारी भी उनको दी थी. फिर तो अपने आप को ही कलयुग का राम समझ लिया.
उनकी बकबक से देश की जनता तो तंग आ ही चुकी है. अब तो उन्होंने बेचारे बेजान रावण के पुतले को भी नहीं छोड़ा. मोदी जी बकबक करते रहे और रावण का पुतला खड़ा खड़ा पकता रहा और इन्तजार करता रहा की कब मोदी जी आएं और उसे जला कर उसे थोड़ी राहत दें.
लेकिन, बकबक करने में तो मोदी जी ने शोले की बसंती को भी पीछे छोड़ दिया है. सो, उन्होंने इतना पकाया , इतना पकाया की रावण ने खुद ही आत्मदाह कर लिया.

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चश्मदीदों के मुताबिक, आत्मदाह करने से पहले, रावण का चेहरा गुस्से से पूरा लाल हो चूका था. उस समय अगर वह आत्मदाह करने का कदम ना उठता तो शायद मोदी जी को ही उठा कर ऊपर पहुंचा देता.

आत्मदाह करने से पहले रावण ने राम के नाम की एक चिठ्ठी भी छोड़ी जिसमे लिखा था,

“हे राम, मेरा सौभाग्य था की तेरे युग में मुझे तेरे हाथों से मुक्ति मिली. लेकिन, क्या वह मेरे किया अपराध की सजा के तौर पर काफी नहीं था की आज कलयुग में मुझे अपने से भी बड़े रावणो के हाथों जलाया जाता है. मैंने तो फिर सीता को हाथ से छुआ तक नहीं था, लेकिन आज मुझे जलने वाले तो ना जाने कितनो का बलात्कार कर चुकने के बाद मुझे जलाने आते हैं. इसे ज्यादा बदकिस्मती की बात मेरे लिए और क्या हो सकती है. राम, भगवन तुमने तो मेरे किये की सज़ा मुझे दे दी लेकिन अब इस कलयुग में कौन सा राम आएगा इन बड़े बड़े भयानक रावणो को उनके किये अनगनित अपराधों की सजा देने के लिए. रावण का अंत सिर्फ राम के हाथों ही हो सकता है, लेकिन इतनी सदियाँ बीत जाने के बाद भी आज भी रावण का पुतला हर साल जलाया जाता है, यह इसी बात का प्रतिक है की रावण को मुक्ति देने वाले राम का अभी भी इन्तज़ार है. जब तक वह राम नहीं आता तब तक यह कलयुगी रावण खुद को राम समझ कर इस नकली रावण के पुतले को यूँही फूंकते रहेंगे.”

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