आनंदीबेन पटेल की जगह, खुद मोदी जी फिर से बनेंगे गुजरात के मुख्यमंत्री. जानिये क्यों.


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मोदी लहर जो 2014 में आयी थी, अब उसकी दिशा उलटी पड़ चुकी है. यह बात, पुरे देश के साथ साथ, खुद प्रधानमंत्री मोदी जी भी अब मानने लग गए हैं. कल वाराणसी में हुई कांग्रेस की रैली और रोड शो की अपार सफलता के बाद तो मोदी जी की नींद और चैन दोनों उड़ गए हैं. वाराणसी में जहाँ, रोड शो के बाद सोनिया गाँधी की तबियत बिगड़ी वहीँ मोदी जी की किस्मत.

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उधर रही सही कसर, मोदी जी का खुद का गड माने जाने वाले गुजरात ने पूरी कर दी है. आनंदीबेन पटेल से इस्तीफ़ा तो ले लिया गया लेकिन अब उनकी जगह किसको बिठा कर उसकी ऐसी तैसी करवाई जाये – ऐसा कोई इंसान नज़र नहीं आ रहा. एक खबर के अनुसार, बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण अडवाणी जी को यह जिम्मेवारी सौंपने के बारे में भी सोचा गया जब खुद अडवाणी जी ने बोला, “अब और कुछ न सही, कम से कम गुजरात का मुख्यमंत्री ही बना दो”. लेकिन, सुनने में आया है की मोदी जी ने खुद इस अडवाणी जी के इस प्रस्ताव को भी हमेशा की तरह नकार दिया है.
अभी अभी मिली ब्रेकिंग न्यूज़ के मुताबिक, मोदी जी खुद इस गुजरात के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठना चाहते हैं. लेकिन यह क्या, प्रधानमंत्री से मुख्यमंत्री – आखिर वे क्यों खुद का डिमोशन करेंगे.
तो खुलासा करने योग्य बात सिर्फ इतनी है की मोदी जी यह कुर्सी सिर्फ कुछ दिनों तक संभालना चाहते हैं ताकि वे अपने पुराने दिनों की याद ताज़ा कर सके जब वे विपक्ष में रहते हुए, UPA सरकार और उनके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी नीतियों को कोसा करते थे. लेकिन खुद PM बनने के बाद तो वे ऐसा कर नहीं पाते. सो अब अपने मन की भड़ास इसी तरह निकालना चाहते हैं. किसी और को प्रधानमंत्री बना कर कुछ दिन तक वे पुराने दिनों की तरह विपक्ष की भूमिका में अपने आप को लेकर जी भर कर गालियां निकलना चाहते हैं. जी हाँ वही गालियां जो वो 2014 से लेकर, आज तक खुद सुनते आ रहे हैं.
एक बार मन की भड़ास निकल जाएगी तो वे फिर से किसी बलि के बकरे को गुजरात मुख्यमंत्री बना कर, वापिस अपनी प्रधानमंत्री की कुर्सी संभल लेंगे.
उस बलि के बकरे की तलाश भी जारी कर दी गयी है जिसके सर पर विधान सभा चुनावो की हार का ठीकरा फोड़ा जा सके (मोदी जी यह तो मान ही बैठे हैं की अब हार तो निश्चित ही है). 🙂

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