नोटबंदी: आखिर मोदी क्यों “काले धन” के जुमले के बाद अब “कैशलैस” का जुमला देकर देश को बेवकूफ बना रहे हैं. मोदी ने देश का किया इतना बड़ा नुक्सान जिसकी भरपाई करने में लगेंगे सालों.


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“ब्लैक मनी” का जूमला पुराना हुआ, अब नया नारा है “कैशलैस”. आप को पता है क्यों?

*क्योंकि इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार 30 नवम्बर तक बैंकों में करीब १२ लाख करोड़ के पुराने 500 और 1000 के नोट आ चुके हैं*.

*ये पूरी उम्मीद है कि 30 दिसम्बर की सीमा तक बाकी के 3 लाख करोड़ भी आ जायेंगे. मतलब , 15 लाख करोड़ के पूरे 500 और 1000 के नोट वापस*.

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*इसका मतलब ये हुआ कि ” ब्लैक मनी” 500 और 1000 के नोट में था ही नहीं. समझदार लोग पहले ही उसे किसी और रूप ( ज़मीन, सोना, डायमंड ) में बदल चुके हैं. शायद, इसलिए नोट जमा करने की समय सीमा अचानक से घटा दे गयी और मोदी सरकार जो सोच रही थी कि जो नोट रिकवर नहीं होंगे उसे काला धन मान के सरकार के प्रॉफिट में जोड़ देंगे , उसका ये प्लान FLOP & FAIL हो गया*

 

पढ़िए, नोटबंदी को लेकर मोदी और जेटली खुद ही इतने कन्फ्यूज्ड हैं कि अपने हर फैसले पर ले रहे हैं यू टर्न.

 

*ये भी याद रखना है कि नए नोट छपने का खर्चा करीब 1.28 लाख करोड़ तक जाएगा , मतलब खाया पिया कुछ नहीं और गिलास तोड़ा बारह आना*

. *जैसे जेटली जी कल कह ही चुके हैं कि ये समस्या शायद 3 महीने तक खिंचे*. *तो मतलब पहले 2- 3 दिन की परेशानी बनी 50 दिन* , *लेकिन अब 50 दिन की जगह 3 महीने.*

*लेकिन एक्सपर्ट की राय माने तो पूरे नोट छपने में करीब 6 महीने लगेंगे और इकोनोमी रिकवर करने में सालों.*

*लोगों की परेशानी, बीमारी , गरीबी, पैसे की कमी से बच्चे, बूढों, रोगियों का मरना, मजदूर , किराने वालों का नुकसान , वो सब तो खैर*

*तो मोदी सरकार समझ गयी है कि हमेशा की तरह ” ब्लैक मनी” भी एक जुमला ही निकला और बहुत ज़ल्द पब्लिक ये समझ जायेगी, भले ही सरकारी & “” CRONY CAPITALIST “”भोंपू ( CRONY CAPITALIST) मीडिया इसे दिखाए या न दिखाए.*

 

नोटबंदी और काले धन पर मोदी की कहानी, एक मछुआरे की ज़ुबानी. पढ़िए आप सब, अगर मजा न आया तो फाँसी चढ़ा देना.

 

*तो नया जुमला फेंका गया ” हो जाओ cashless” . मतलब किस किस्म का भद्दा मज़ाक है ये!*

*जिस देश में क्रेडिट कार्ड सिर्फ 2 % लोगों के पास है, खाते सिर्फ आधी जनसंख्या के पास है, अंगेजी सबकी भाषा नहीं है, जिन गाँवों में ATM तो क्या बैंक्स भी नहीं पहुंचे, आप उनसे कह रहे हो ” हो जाओ cashless”. संवेदनहीनता की भी कोई सीमा होती है.*

*अरे जो होना होता है, वो हो जाता है, उसके लिए ज़बरदस्ती नहीं करनी पड़ती*.

*राजीव गाँधी का सपना था घर घर टीवी COMPUTER लाना , उन्होंने रामानंद सागर और बी आरचोपड़ा को बुला कर ” रामायण” और ” महाभारत” टीवी पर प्रसारित करने का प्लान बनाया और घर घर टीवी हो गया.*

*राजीव गाँधी को कंप्यूटर लाना था, आ गया!*

*नरसिंहराव, मनमोहन सिंह को इंडिया की खिड़कियाँ , दरवाज़े खोलने थे, उन्होंने खोल दिए और देश हमेशा के लिए बदल कर हमें एक ग्लोबल संस्कृति का हिस्सा बना दिया.*

*करने वाले पिछले 10 साल से cashless हैं* ,
और
*इन्टरनेट बैंकिंग कर रहे हैं उन्हें मोदी की सलाह की ज़रुरत नहीं*.

 

जब नोटबंदी हुई फेल तो अपनी नाकामी छिपाने के लिए मोदी ने ब्लैक-टू-वाइट का रायता फैलाना शुरू किया.

 

*लेकिन cash को फ्रीज कर के लोगों को मजबूर कर के, आप लोगों को अपग्रेड नहीं बल्कि torture कर रहे हैं*.

*लेकिन जैसे कि शुरू में कहा, शायद ” ब्लैक मनी” का मुद्दा हाथ से जाने के बाद अब मोदी सरकार के पास ” हो जाओ cashless” नारा ही बचा. आखिरकार 6 महीने लोगों को गुमराह करना है, मजबूरी है.*

The Prime Minister talks about Cashless Economy and gives the example of Sweden.

Here is a little comparison:

Sweden:
Population: 9.8million
Average Internet Speed:18.6 Mbs
*Cost of 1Mbs internet per month:$0.63(₹44)*
I.e. MORE THAN COST OF 1 KG
Internet Penetration: 96%
Poverty: 9% (~8 Lac people)

India: population: 1.32billion
Average Internet Speed: 3.5 Mbs
*Cost of 1Mbs internet per month:~$5-15(₹280-1000)*
Internet Penetration: 34.8%
Poverty: 21.9% (~33 cr people)*

*When 1/5th of the people not able to buy even aata for their rotis, our Prime Minister is expecting them to buy data for cashless transactions.*

*What a bunch of moronic rulers and a multitude of even more moronic followers!*

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