दलितों के घर खाना खाने के लिए राजनीतिक नेताओं का लगा ताँता


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लगता है दलितों के घर जाकर खाना खाने का फैशन सा बन गया है. जिसको देखो मुंह उठा कर किसी न किसी दलित के घर अपने फोटोग्राफर के साथ पहुँच जाता है. खाना खाना तो सिर्फ बहाना है, असल में तो दलितों को लुभा कर उनके वोट हथियाना है.

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दलित के घर खाना खाने का नाटक पुरे ज़ोरो पर है.

पहले राहुल गांधी और अब अमित शाह अपने पुरे लैश लश्कर के साथ दलित के घर पहुँच गए और लगे खाना खाने. हालाँकि अमित शाह तो राहुल गांधी से भी दो कदम आगे ही नज़र आये. ना सिर्फ वे अपना खाना घर से बनवा कर ले गए बल्कि बिसलेरी पानी की बोतलें भी खुद ही ले गए तांकि दलित के घर का बासा खाना और गन्दा पानी न पीना पड़े. लेकिन चाहे राहुल गांधी हो या फिर अमित शाह, एक चीज जो दोनों ही ले जाना नहीं भूले वह है कैमरा. सो, कैमरा के सामने दोनों ने ऐसा धांसू पोज़ दिए की जैसे दोनों खुद ही एक दलित हैं और एक झोंपड़े में रहकर अपना गुज़ारा करते हैं.

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उधर सुनने में आया है की इन दोनों की देखा देखी, और भी कई राजनीतिक नेता भारत के दूर दराज़ों के गांवों में दलितों के घर खाना खाने पहुँच रहे हैं. आलम यह है की दलित के घर खाना खाना काफी डिमांड में है और कई दलितों के पास पहले से ही कई महीने की बुकिंग हो चुकी है. इसलिए अब कोई भी और नेता उनके पास आ रहा है तो उन्हें मजबूरन मना करना पड़ रहा है और उन्हें कुछ महीने बाद की डेट दे रहे हैं. कुछ तो पुरे 2016 की बुकिंग कर चुके हैं और अगली डेट 2017 की दे रहे हैं. ऐसा देश के कई राज्यों में आ रहे चुनाव के मद्दे नज़र हो रहा है.

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