नवजात शिशुओं को अब बीमारिओं से बचने वाले टीकों के साथ साथ इंटरनेट और मोबाइल से बचने के लिए भी लगाए जाएँगे टीके.


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सरकार जल्द ही पोलीयो ड्रॉप्स को बंद करने पर विचार कर रही है. इसका कारण है पोलीयो पर काफ़ी हद तक पूरे देश में कंट्रोल किया जा चुका है. हालाँकि, सूत्रों की माने तो अब सरकार इसकी जगह कुछ और टीके और ड्रॉप्स को लाने जा रही है. माना जा रहा है की आजकल बच्चों में इंटरनेट और मोबाइल का काफ़ी हद तक बुरा प्रभाव पड़ रहा है. ज़्यादातर बच्चे मोबाइल और इंटरनेट के आदि हो चुके है जिसके वजह से इनका नकारात्मक प्रभाव काफ़ी नयी बीमारिओं को पैदा कर रहा है. सरकार का मानना है की इन पर जल्द ही कंट्रोल नहीं किया गया तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है.

इसलिए सरकार ने निर्णय लिया है की अब नवजात शिशुओं को लगने वाले टीकों और पीने वाली ड्रॉप्स में कुछ और नये टीके और ड्रॉप्स जोड़े जाएँगे. यह टीके और ड्रॉप्स नवजात शिशुओं को इंटरनेट और मोबाइल की लत पड़ने से बचाएँगे और इनके इस्तेमाल से पैदा होने वाली कई बीमारिओं के बुरे प्रभाव से भी बच्चों की रक्षा करेगा.

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मोबाइल की लत से पीड़ित एक 6 महीने का बच्चा.

यह नये टीके और ड्रॉप्स सभी पाँच साल से कम उमर के बच्चों के लिए ज़रूरी होंगे और सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ़्त लगाए जाएँगे. सूत्रों की माने तो सरकार पहले से चले आ रहे काफ़ी टीकों को हटाकर इन नये टीकों को ला रही है.

ऐसा इसलिए क्यूंकी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक पहले की बीमारिओं के अपेक्षा इंटरनेट और मोबाइल ज़्यादा भयानक और जानलेवा बीमारिओं का कारण बन के उबर रहे हैं. इसलिए यह माना जा रहा है की पहले लगने वाले टीकों के बिना भी काम चल सकता है लेकिन अगर नवजात शिशुओं को इन मोबाइल और इंटरनेट से बचने के टीके नही लगाए गये तो भविष्य में इनकी लत और उससे उत्पन होने वाले बीमारिओं की रोकथाम बहुत ही मुश्किल हो जाएगी. यह सिर्फ़ भारत के लिए ही नही बल्कि पूरे विश्व में इसके दुष्प्रभाव को रोकना अब अति आवश्यक हो गया है.

यह अब साबित हो चुका है की दुनिया भर के बच्चे कुपोषण से ज़्यादा मोबाइल और इंटरनेट की लत से ज़्यादा पीड़ित हैं और अगर इनका समय रहते बचाव नही किया गया तो भविष्य में यह माहमारी का रूप धारण कर लेगा और पूरा संसार इसके चपेट में आ जाएगा. बताया जा रहा है की इसका प्रभाव वर्ल्ड वॉर से भी ज़्यादा भयानक हो सकता है.

युनाइटेड नेशन्स ने इस पर अपनी चिंता व्यक्त की है और परमाणु हथियारों की तरह इस पर भी जल्द ही कोई नीति बनाने वाले हैं जिस पर इसके सभी मेंबर देशों को अपनी सहमति देनी होगी और मोबाइल और इंटरनेट के अत्यादिक इस्तेमाल को रोकना होगा.

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