अबे तोगड़िया, नामर्दी या नंपुसकता का हिन्दू धर्म से क्या लेना.


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विशव हिन्दू परिषद के प्रवीण तोगड़िया को तो सब जानते हैं लेकिन किसी को पता है की यह इंसान पेशे से एक डॉक्टर है. भाई, किसने इस इंसान को डॉक्टर की डिग्री दी है, ज़रा सामने तो लायो.
योगी आदित्यनाथ की तरह प्रवीण तोगड़िया भी हिन्दुओं की घटती आबादी से खासे परेशान हैं. आये दिन, योगी की तरह यह भी इसी सम्बन्ध में कोई न कोई भड्काउन ब्यान देते रहते हैं. मुझे तो समझ में नहीं आता, यह योगी आदित्यनाथ और प्रवीण तोगड़िया को दूसरों के बच्चों में इतनी दिलचस्पी क्यों है. अम्मा यार, तुम अपने 15 – 20 बच्चे पैदा करके दिखाओ न. दूसरों को क्यों कोसते हो.

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प्रवीण तोगड़िया साब कहते हैं की हिन्दुओं में नामर्दी यानि नंपुसकता बढ़ रही है. अब तो हद कर दी भाई तोगड़िया ने.
अबे, भूतनी के … किसी इंसान का नामर्द होने का उसके धर्म से क्या लेना देना है. भाई तू तो डॉक्टर है, तेरी डॉक्टरी के हिसाब से ज़रा बता तो, किस तरह से कोई इंसान सिर्फ इसलिए नामर्द है क्यूंकि वह हिन्दू है.
इन भाई साहब का लॉजिक भी किसी के पल्ले नहीं पड़ सकता. घूम फिर के तोगड़िया भी वहीँ आ जाता है जहाँ योगी आदित्यनाथ. यानि की तोगड़िया को भी इस बात से परेशानी है की मुसलमानो की आबादी बढ़ रही है. भाई अगर किसी मुसलमान ने एक से ज्यादा शादी की है तो जाहिर तौर पर उस इंसान के बच्चे ज्यादा ही होंगे. लेकिन भाई तूने तो हद कर दी, क्यूंकि हिन्दुओं की संख्यां घट रही है तो तूने यह समझ लिया की हिन्दू धर्म के लोग ज्यादा नामर्दी या नमपुंसकता के शिकार होते हैं.
तोगड़िया, भाई तूने अपनी खुद की बनाई हुई दवाई बेचनी थी, वह ठीक है लेकिन उसके लिए पुरे हिन्दू धर्म के मर्दों पर लांछन लगाने की क्या जरुरत थी (जिस किसी को नहीं पता तो उनकी जानकारी के लिए बता दूँ, की तोगड़िया के हिसाब से उसने नामर्दी या नमपुंसकता को हटाने के लिए एक दवाई बनाई है जोकि वह 500 रुपये रुपए में बेच रहा है ).
वाकई में तोगड़िया, तूने साबित कर दिया की तू पेशे से एक डॉक्टर ही है. इसीलिए अपनी दवाई को बेचने के लिए तू कुछ भी कर सकता है. यहाँ तक की पुरे हिन्दू धर्म के मर्दों को नामर्द तक बता सकता है.
मुझे तो, तेरे और पटरी पर बैठ कर दवाई बेचने वाले में कोई फरक नहीं नज़र आ रहा. पटरी पर बैठ हुआ एक अनपढ़ देसी दवाइओं के नाम पर अक्सर नामर्दी आदि की दवाइयां बेचता नज़र आएगा. वही हाल तोगड़िया का है. इसने भी नामर्दी की बीमारी का इस्तेमाल किया लोगो को बेवकूफ बनाने के लिए. भाई तोगड़िया, पटरी पर दवाइयां बेचने वाले की तो मजबूरी है. तेरी कौन सी मजबूरी थी बे साले. तू तो कैंसर का सर्जन रहा है. अच्छा होता तू कैंसर या और कोई खतरनाक बीमारी का इलाज ढूंढता या दवाई बनाता तो लोग तुझे दुआएं देते.
लेकिन तूने क्या किया. एक जाहिल इंसान की तरह बना दी नामर्दी की दवाई. उसमे भी शक है.. शक क्या पूरा यकीन है की तूने कोई ऐसा ही चूर्ण लेकर दवाई के नाम पर लोगो को चुना लगा रहा है. हद है भाई कमीनेपन की.
आप लोगो में से जो जो हिन्दू है, तो भाई कमेंट करके बताओ की कितने नामर्द है या नमपुंसकता के शिकार है. भगवान् न करे, अगर कोई है भी, तो भाई ज़रा यह बताना की आपकी नामर्दी और आपके हिन्दू धर्म का होने में क्या सम्बन्ध है.
तोगड़िया, तेरा तो भगवान् भी मालिक नहीं.

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